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पतंजलि के बेस्ट प्रोडक्ट

    पतंजलि की 3 बेस्ट प्रोडक्ट्स पतंजलि भारत की सबसे तेजी से उठने वाली कंपनी है। आयुर्वेदिक दवाइयों से लेकर खाने पीने की चीज और कॉस्मेटिक जैसी सभी प्रोडक्ट्स बनाती है। पतंजलि के 2400 से भी ज्यादा प्रोडक्ट्स आज बाजार में है , तो आइए आपको पतंजलि के पांच सस्ते और अच्छे प्रोडक्ट्स बताते है। 1. पतंजलि का गुलाब जल -   गुलाब जल एक औषधि के रूप में काम करता है । ये चेहरे से ऑयल और गंदगी को निकल फेंकता है। और स्किन से दाग धब्बों को भी मिटाता है। अब हम आपको बताते है की पतंजलि गुलबजल ही क्यों क्योंकि इसमें आपको 💯 परसेंट गुलाब जल ही मिलेगा बाकी आपको बाजार में मिलने वाले दूसरे कम्पनी के गुलाबजल में आपको हार्मफुल कैमिकल देखने को मिलेगा। MRP - 28 2.सिलाजित - सिलाजीत एक मोटा चिपचिपा पदार्थ होता है । सिलाजीत शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता bdati है। पतंजलि सुद्ध सिलाजित एक आयुर्वेदिक औषधि है । MRP - 94 3.3. 3. पतंजलि dishwash bar - ये साबुन राख से बनी हुई है। पतंजलि dishwas bar में कोई कैमिकल का उपयोग नही किया गया है , ये साबुन आपके हाथो को बिलकुल स्वस्थ रखती है ।

सुमेल-गिरी युद्ध

 

गिरी सुमेल युद्ध के बाद एक कवी ने

कहा:-


"शौर्य कथा इतिहास भरे, पर रंग अलग रजपूती को ।"


5 जनवरी 1544, बलिदान दिवस - गिरि सुमेल रण


सुमेल-गिरी युद्ध : मारवाड़के 6 हजार योद्धाओं ने पीछे हटने को मजबूर कर दिया था शेरशाह की 80 हजार से ज्यादा मुस्लिम सेना को


शेरशाहसूरी को “एक मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत खो देता’ कहने के लिए मजबूर करने वाले मारवाड़ के रण बांकुरों के शौर्य की साक्षी रही सुमेल गिरी रणभूमि इतिहास के पन्नों में अपने गौरव के लिए जानी जाती है। पहाड़ी दर्रों के बीच हुए हल्दी घाटी युद्ध से भी 32 साल पूर्व मारवाड़ के पहाड़ी मैदान में लड़ी गई


इस लड़ाई के जांबाज राव जैता, राव कूंपा, राव खींवकरण, राव पंचायण, राव अखैराज सोनगरा, राव अखैराज देवड़ा, राव सूजा, मान चारण, लुंबा भाट अलदाद कायमखानी सहित 36 कौम के लगभग 6 हजार (कुछ किताबों में 12 हजार) सैनिकों ने शेरशाह की 80 हजार सैनिकों की भारी भरकम सेना का डटकर मुकाबला किया।इससे शेरशाह के सैनिकों में भगदड़ मच गई। 


छोटी सेना के बड़े पराक्रम को भांप कर शेरशाह के सैनिकों ने उनको गिरी-सुमेल छोड़ने की सलाह दे दी। हालांकि बौखलाए शेरशाह को तब यह कहना पड़ा कि “एक मुट्ठी बाजरे के लिए वह दिल्ली की सल्तनत खो देता।’ इस रण में मारवाड़ के पराक्रमी जांबाज बलिदान हो गए, लेकिन इनका युद्ध कौशल साक्षी रहा युद्ध स्थल इतिहास का अध्याय बन गया। 


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