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जनवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पतंजलि के बेस्ट प्रोडक्ट

    पतंजलि की 3 बेस्ट प्रोडक्ट्स पतंजलि भारत की सबसे तेजी से उठने वाली कंपनी है। आयुर्वेदिक दवाइयों से लेकर खाने पीने की चीज और कॉस्मेटिक जैसी सभी प्रोडक्ट्स बनाती है। पतंजलि के 2400 से भी ज्यादा प्रोडक्ट्स आज बाजार में है , तो आइए आपको पतंजलि के पांच सस्ते और अच्छे प्रोडक्ट्स बताते है। 1. पतंजलि का गुलाब जल -   गुलाब जल एक औषधि के रूप में काम करता है । ये चेहरे से ऑयल और गंदगी को निकल फेंकता है। और स्किन से दाग धब्बों को भी मिटाता है। अब हम आपको बताते है की पतंजलि गुलबजल ही क्यों क्योंकि इसमें आपको 💯 परसेंट गुलाब जल ही मिलेगा बाकी आपको बाजार में मिलने वाले दूसरे कम्पनी के गुलाबजल में आपको हार्मफुल कैमिकल देखने को मिलेगा। MRP - 28 2.सिलाजित - सिलाजीत एक मोटा चिपचिपा पदार्थ होता है । सिलाजीत शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता bdati है। पतंजलि सुद्ध सिलाजित एक आयुर्वेदिक औषधि है । MRP - 94 3.3. 3. पतंजलि dishwash bar - ये साबुन राख से बनी हुई है। पतंजलि dishwas bar में कोई कैमिकल का उपयोग नही किया गया है , ये साबुन आपके हाथो को बिलकुल स्वस्थ रखती है ।

ऐसी कौन सी मोबाइल एप्लीकेशन है जो हर किसी की मोबाइल फोन में जरूर होनी चाहिए

  ऐसी कौन सी मोबाइल एप्लीकेशन है जो हर किसी की मोबाइल फोन में जरूर होनी चाहिए?   #OLDRWT सबसे पहले जवाब दिया गया:  वो 5 मोबाइल ऐप कौन से हैं जो हर किसी के फोन में अवश्य होने चाहिए? मैंने इससे पहले अच्छी अच्छी एप्लीकेशन का नाम बता चुका था परंतु पता नहीं Quora द्वारा मेरा यह जवाब हटा दिया गया था।कोई बात   नहीं आज संयोग मिला तब मैंने फिर से ये पोस्ट को लिखने जा रहा हूं।आज का जो पोस्ट है उसका बहुत ही अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिला था।आशा करते हैं कि आप लोगो अच्छा लगेगा। वैसे तो बहुत सारे ऐसे कई ऐप्स है जिसका अपना अपना यूनिक कार्य है।परंतु मैं आपको कुछ ऐसे ही एप्लीकेशन के बारे में बताऊंगा जो आपको मददगार से साथ साथ मस्ती भी कर सकते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि कि दुनिया में अजीबो गरीब ऐप्स मौजूद है लेकिन उसका हमें रिसर्च करने की आवश्यकता है। 1] Google Translate  :- अगर आप किसी भी भाषा को किसी दूसरे भाषा में ट्रांसलेट करना चाहते हैं तब यह ऐप्स आपके लिए सबसे बेस्ट है इसमें आप दुनिया के किसी भी भाषा में कन्वर्सेशन भी किसी भी व्यक्ति के साथ कर सकते हैं। Google Transla...

भगवान शिव के गले में सर्प की माला क्यों होती है

  भारत में नागकुल और नागों के रहस्य को सुलझाना अत्यंत ही कठिन है। क्या पहले सर्पमानव होते थे या कि सर्प जातियों के नाम के आधार पर ही मानव की जातियों का निर्माण हुआ? कुछ भी हो लेकिन यह तो तय है कि सभी नाग प्रजातियां भगवान शिव        जय शिव शंकर की भक्त थीं। उनका धर्म भी शैव धर्म ही था। वासुकिके उल्लेखनीय कार्य :  वासुकि भगवान शिव के परम भक्त थे। माना जाता है कि नाग जाति के लोगों ने ही सर्वप्रथम शिवलिंग की पूजा का प्रचलन शुरू किया था। वासुकि की भक्ति से प्रसन्न होकर ही भगवान शिव ने उन्हें अपने गणों में शामिल कर लिया था। वासुकी को नागलोक का राजा माना गया है। समुद्र मंथन के दौरान वासुकि नाग को ही रस्सी के रूप में मेरू पर्वत के चारों और लपेटकर मंथन किया गया था, जिसके चलते उनका संपूर्ण शरीर लहूलुहान हो गया था। जब भगवान श्री कृष्ण को कंस की जेल से चुपचाप वसुदेव उन्हें गोकुल ले जा रहे थे तब रास्ते में जोरदार बारिश हो रही थी। इसी बारिश और यमुना के उफान से वासुकी नाग ने ही श्री कृष्क्ष की रक्षा की थी। वेबदुनिया के शोधानुसार वासुकी ने ही कुंति पुत्र भीम को दस हजार हाथ...

सरदार बल्लूजी चम्पावत

 अमरसिंह जी की हत्या के समाचार नागौर पहुंचे तो उनकी एक रानी हाड़ी (बूंदी के हाड़ा शासकों की पुत्री) ने अमरसिंह जी की पार्थिव देह के साथ सत्ति होने की इच्छा जताई .. .. किन्तु .... रानी सती हो कैसे ?? .... अमरसिंह जी का शव तो आगरा किले में मुगलों की गिरफ्त में कैद पड़ा था .... हाड़ी को अपने विश्वासपात्र हरसोलाव (नागौर) के राठौड़ सरदार बल्लूजी चम्पावत की याद आयी .... अमरसिंह को विपत्तिकाल में साथ देने का अपना कौल (वचन) निभाने बल्लूजी मेवाड़ महाराणा द्वारा प्राप्त घोड़े पे सवार हो के अपने 500 राजपूतों के साथ आगरा कूच कर गए .... कूटनीति से आगरा किले में प्रवेश लेने के बाद बल्लूजी ने अमरसिंह जी के शव को अकेले मुगलों की कैद से निकाला और घोड़े पे सवार हो के किले के बुर्ज से नीचे छलांग लगा दी .... बल्लूजी ने किले के बाहर मौजूद अपने राजपूतों को अमरसिंह जी का शव सौंप के नागौर रवाना किया और अपने चंद मुट्ठी भर साथियों के साथ मुगल सेना को रोकने के लिए खुद दुबारा आगरा किले में प्रवेश कर गए .... घोड़े की लगाम को मुंह मे दबाकर दोनों हाथों में तलवार ले के बल्लूजी मुगल सेना से भीड़ गए .... आगरा का किला राजपूतो...

राव चन्द्रसेन

 'मारवाड़ के राणा प्रताप' स्वाभिमानी योद्धा राव चंद्रसेन जी राठौड़ की 440वीं पुण्यतिथि पर शत शत नमन..... राजपूताने का दुर्भाग्य रहा है कि महाराणा सांगा, महाराणा राजसिंह जी, राव चंद्रसेन जी जैसे महावीरों को विश्वासघातियों ने उस समय ज़हर दिया, जब वे मुग़लिय सत्ता से संघर्ष की चरम सीमा पर थे राव चन्द्रसेन का जन्म 30 जुलाई, 1541 ई. को हुआ था। राव चन्द्रसेन के पिता का नाम राव मालदेव था। राव चन्द्रसेन जोधपुर, राजस्थान के राव मालदेव के छठे पुत्र थे। लेकिन फिर भी उन्हें मारवाड़ राज्य की सिवाना जागीर दे दी गयी थी, पर राव मालदेव ने उन्हें ही अपना उत्तराधिकारी चुना था। राव मालदेव की मृत्यु के बाद राव चन्द्रसेन सिवाना से जोधपुर आये 1619 को जोधपुर की राजगद्दी पर बैठे। चन्द्रसेन के जोधपुर की गद्दी पर बैठते ही उनके बड़े भाइयों राम और उदयसिंह ने राजगद्दी के लिए विद्रोह कर दिया। राम को चन्द्रसेन ने सैनिक कार्यवाही कर मेवाड़ के पहाड़ों में भगा दिया और उदयसिंह, जो उसके सहोदर थे, को फलौदी की जागीर देकर संतुष्ट कर दिया। राम ने अकबर से सहायता ली। अकबर की सेना मुग़ल सेनापति हुसैन कुली ख़ाँ के नेतृत्व में...

सुमेल-गिरी युद्ध

  गिरी सुमेल युद्ध के बाद एक कवी ने कहा:- "शौर्य कथा इतिहास भरे, पर रंग अलग रजपूती को ।" 5 जनवरी 1544, बलिदान दिवस - गिरि सुमेल रण सुमेल-गिरी युद्ध : मारवाड़के 6 हजार योद्धाओं ने पीछे हटने को मजबूर कर दिया था शेरशाह की 80 हजार से ज्यादा मुस्लिम सेना को शेरशाहसूरी को “एक मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत खो देता’ कहने के लिए मजबूर करने वाले मारवाड़ के रण बांकुरों के शौर्य की साक्षी रही सुमेल गिरी रणभूमि इतिहास के पन्नों में अपने गौरव के लिए जानी जाती है। पहाड़ी दर्रों के बीच हुए हल्दी घाटी युद्ध से भी 32 साल पूर्व मारवाड़ के पहाड़ी मैदान में लड़ी गई इस लड़ाई के जांबाज राव जैता, राव कूंपा, राव खींवकरण, राव पंचायण, राव अखैराज सोनगरा, राव अखैराज देवड़ा, राव सूजा, मान चारण, लुंबा भाट अलदाद कायमखानी सहित 36 कौम के लगभग 6 हजार (कुछ किताबों में 12 हजार) सैनिकों ने शेरशाह की 80 हजार सैनिकों की भारी भरकम सेना का डटकर मुकाबला किया।इससे शेरशाह के सैनिकों में भगदड़ मच गई।  छोटी सेना के बड़े पराक्रम को भांप कर शेरशाह के सैनिकों ने उनको गिरी-सुमेल छोड़ने की सलाह दे दी। हालांकि बौ...